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कुछ खोया हूँ, कुछ पाया हूँ

ना जाने आज क्यों आज  कुछ लिखने का मन किया।  खुद को आंक रहा हूँ।  आखिर क्या पाया मैंने पिछले सात सालों  में। और खोना क्या है, कुछ लेकर तो आया नही हूँ यहाँ, तो जो भी आज हूँ इसमें भगवान का लाख लाख शुक्रिया। फिर भी चलो लिखते हैं :-  १. एक अच्छी पारिवारिक जीवन मिला, भगवान की कृपा से बेटी घर आयी.  २. माँ बाप की सेवा का मौका मिला.  ३. छोटी बहन की भी सगाई हो चुकी है।  मनुष्य की इच्छाएँ कभी कम नही होती, ओर उसी सन्दर्भ में एक बात करनी है, एक पारिवारिक दौरा माँ बाप के साथ बाकीं रह गया है. 

गुमनाम क्यों कहा

न ही मै गूम था ना ही अनाम फ़िर क्यों पड़ा मेरा नाम गुमनाम दुनिया भी अजीब है दुनियावाले भी हैरान- परेशान फ़िर पूछता हूँ किस नै रखा मेरा नाम गुमनाम जरा कोई उससे भी पूछे क्या है तेरा नाम

Why professional.......

A no. of relation can exist among persons but why professional......... person is more successful in the present time whoever is professional  they doesn't have any kinda feeling for others they observe and react with others in profit and loss 

जब उन्हें मेरी जरुरत थी

पल बीत गये वो समय बीत गया जब उन्हें मेरी जरूरत थी न जाने क्या क्या बहने क्या क्या नजराने लिए अक्सर आया करती थी मेरे पास खत्म हुआ हलचल बीत गया वो पल जब उसे जरूरत थी मेरे साथ की न रहा उसका साथ न रही उससे कोई आस न ही रह पाई वो मेरी खाश क्या क्या खोया क्या पाया .......... कातिब--- नरेन्द्र कुमार