कुछ खोया हूँ, कुछ पाया हूँ
ना जाने आज क्यों आज कुछ लिखने का मन किया। खुद को आंक रहा हूँ। आखिर क्या पाया मैंने पिछले सात सालों में। और खोना क्या है, कुछ लेकर तो आया नही हूँ यहाँ, तो जो भी आज हूँ इसमें भगवान का लाख लाख शुक्रिया। फिर भी चलो लिखते हैं :- १. एक अच्छी पारिवारिक जीवन मिला, भगवान की कृपा से बेटी घर आयी. २. माँ बाप की सेवा का मौका मिला. ३. छोटी बहन की भी सगाई हो चुकी है। मनुष्य की इच्छाएँ कभी कम नही होती, ओर उसी सन्दर्भ में एक बात करनी है, एक पारिवारिक दौरा माँ बाप के साथ बाकीं रह गया है.