जब उन्हें मेरी जरुरत थी

पल बीत गये वो समय बीत गया जब उन्हें मेरी जरूरत थी
न जाने क्या क्या बहने क्या क्या नजराने लिए अक्सर आया करती थी मेरे पास
खत्म हुआ हलचल बीत गया वो पल जब उसे जरूरत थी मेरे साथ की
न रहा उसका साथ न रही उससे कोई आस न ही रह पाई वो मेरी खाश
क्या क्या खोया क्या पाया ..........
कातिब---
नरेन्द्र कुमार

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